Thursday, January 01, 2009

हर हाल में सूरज अपना है, एक रोज़ ये दावा कर देंगे
हम एहल-ऐ-जुनून ये जब चाहे, दुनिया में उजाला कर देंगे

बस बात है अपनी मर्ज़ी की, कश्ती को बचाना आता है
तूफ़ान पलट कर चल देगा, जिस वक़्त इशारा कर देंगे.

- जुनून

5 comments:

G is a G said...

waaaah..waaaaaah...waaaaaaaaaaaaaaaaaahh

Vineet Patawari said...

brilliant...very well written!

Ummed Singh Baid "Saadhak " said...

मजा आ गया दाविश,तेरी नज्मों में वो दम है.
नपुंसकों में पौरूष भर दे,सचमुच इतना दम है.
सचमुच इतना दम है यारा, रोज क्यों नहीं लिखते?
इतने बन्दे जिन्दा हैं, जो ऐसी नज्में पढते.
कह साधक कविराय. विनीत ने पता है दिया.
तेरी नज्मों में वो दम है दाविश मजा आ गया.

Dhavish said...

Thanks ppl.

A clarification : This one is not written by me, its a collected one from internet.

Ritesh said...

Dhaansu item maara hai internet se, junta gachhha kha rahi hai.... waise information-overload ke iss daur mai ek achhi rachna dudhana bhi ek kala hai.... aur usse bina apna naam diye chaap dena insaniyat [:P]

he he he.... chaa rahe ho... lage raho!!