Thursday, October 16, 2008

नोच कर शाखों के तन से खुश्क पत्तों का लिबास,
सर्द मौसम बाँझ रुत की बे-लिबासी दे गया.
ले गया खुशबू वो मुझसे अभ्र बनता आसमान,
उसके बदले में ज़मीन सदियों की प्यासी दे गया.

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